भारत में गरीबी (निबंध) Poverty in India

  General Knowledge

गरीबी भारत के लिए एक बहुत बड़ी समस्या रही है जिसका रोजगार एवं जीवन स्तर से प्रत्यक्ष सम्बन्ध है | गरीबी का आकलन भी देश के लिए एक जटिल समस्या आ रही है | देश में गरीबी का आकलन योजना आयोग द्वारा एन. एस. एस. ओ. (NSSO) के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षणों का आधार बनाकर किया जाता रहा है |वर्तमान में गरीबी का आकलन तेंदुलकर समिति (2005) द्वारा बताई गई बिधि द्वारा किया जाता है (इसके पहले लकडावाला समिति , १९९३ की विधि का प्रयोग होता था )| इस समितियों द्वारा गरीबी के आकलन में जनसँख्या के द्वारा उपभोग की गयी ऊर्जा की मात्रा (ग्रामीण क्षेत्रों में २४०० कैलोरी एवं शहरी क्षेत्रों में २१०० कैलोरी प्रति दिन ) को आधार बनाया गया था | दोनों समितियों की सलाहों में एक बड़ा अंतर था मुद्रास्फीति को लेकर जहाँ पहले ऊर्जा उपभोग के मूल्य निर्धारण के लिए ग्रामीण (CPI-AL) एवं शहरों (CPI-IW) का उपयोग होता था |वहीँ तेंदुलकर समिति ने इसके लिए गरीबी रेखा के नजदीक की जनसँख्या के उपभोग में आने वाले उत्पादों के टोकरे पर आधारित करने की सलाह डी गयी (जिसे आने वाले समय में गरीबी के आकलन में उपभोग भी किया जाने लगा ) इसी कारण से हम लकड़ा वाला एवं तेंदुलकर समितियों के गरीबी के अनुमानों में अंतर भी पाते हैं -वर्ष २००४-०५ के लिए दोनों के अनुमान निम्न प्रकार रहे:

समितिग्रामीण शहरी कुल
लकडावाला समिति 28.3025.7027.50
तेंदुलकर समिति 41.827.5037.20

वर्ष २०१२ में योजना आयोग द्वारा एक नए विशेषज्ञ पैनेल की स्थापना की गयी |सी. रंगराजन की अध्यक्षता में गठित इस पैनेल की सलाह वर्ष २०१४ में उपलब्ध हुई | जिसे गरीबी के अनुमान की नयी विधि कराने की कोशिश की गयी |लेकिन जल्द ही केंद्र की नयी सरकार द्वारा इस दिशा में एक और वृहत कदम उठाया गया -अरविन्द पंगढ़िया (तत्कालीन उपाध्यक्ष ,नीति आयोग ) की अध्यक्षता में टास्क फाॅर्स (२०१५) गठित किया गया जिसे गरीबी के अनुमान लगाने के साथ साथ इसके उन्मूलन के लिए एक समग्र रणनीति की सलाह देने को खा गया | टास्क फाॅर्स द्वारा अपने सुझाव २०१७ में सौंपे गए जिसमे गरीबी के सही अनुमान के लिए एक विशेषज्ञ समिति की स्थापना की सलाह दी गयी तथा जिसमे राज्यों की भागदारी पर विशेष बल दिया गया | इस दिशा में सरकार की तरफ से अब कदम उठाये जाने की सम्भावना है | फिलहाल देश में गरीबी के अनुमान (अगस्त २०१९) निम्न प्रकार हैं :

ग्रामीण गरीबी २५.७ प्रतिशत
शहरी गरीबी १८.१ प्रतिशत
सकल गरीबी २१.९ प्रतिशत

बहुआयागी गरीबी सूचकांक २०१९ के अनुसार भारत में वर्ष 2005-०६ से 2015-2016 के मध्य गरीबी के उन्मूलन में भारी सफलता प्राप्त की गयी लेकिन गरीबी अब भी एक बहुत बड़ी समस्या है |इसके अनुसार ऐसी गरीबी इस अवधि में घटकर २७.९ प्रतिशत रह गयी और भारत कुल २७.१ करोड़ लोगों को गरीबी से बहार कर सका (वर्ष 2005-2006 में ऐसे गरीबों की संख्या ५५.१ प्रतिशत थी )| गरीबी के उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा वर्तमान में अन्यान्य कार्यकर्मों को कार्यान्वित किया जा रहा है जिनका सम्बन्ध बहु आयामी गरीबी से है तथा बल पोषण , शिक्षा , स्वास्थ्य इत्यादि पहलुवों पर है |

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