होलिका दहन क्यूँ किया जाता है?

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बड़ी होली से पहले छोटी होली वाले दिन पवित्र अग्नि जलाते हैं, यह रोशनी प्रहलाद की अच्छाई की जीत का प्रतीक है जिसमें उसके पिता हिरण्यकश्यप और बुआ होलिका की बुराई जलकर समाप्त हो गई थी।

पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप बहुत ही अभिमानी राजा था, वह खुद को भगवान समझता था और चाहता था कि हर कोई भगवान की तरह उसकी पूजा करें। वहीं अपने पिता के आदेश का पालन न करते हुए हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद ने उसकी पूजा करने से इंकार कर दिया और उसकी जगह भगवान विष्णु की पूजा करना जारी रखा। इस बात से नाराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को कई सजाएं दी जिनसे वह प्रभावित नहीं हुआ। इसके बाद हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका ने मिलकर एक योजना बनाई कि वह प्रहलाद के साथ चिता पर बैठेगी।

होलिका के पास एक ऐसा कपड़ा था जिसे ओढ़ने के बाद उसे आग में किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता, दूसरी तरह प्रहलाद के पास खुद को बचाने के लिए कुछ भी न था। जैसे ही आग जली, वैसे ही वह कपड़ा होलिका के पास से उड़कर प्रहलाद के ऊपर चला गया. इसी तरह प्रहलाद की जान बच गई और उसकी जगह होलिका उस आग में जल गई… यही कारण है होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

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