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राष्ट्रपति

राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है

भारत के संविधान का अनुच्छेद 54 राष्ट्रपति के चुनाव की व्याख्या करता है। इसके अनुसार, राष्ट्रपति को एक निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किया जाएगा, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, राज्य की विधानसभाओं के सदस्य और और दो केंद्र शासित प्रदेश, अर्थात् दिल्ली और पुदुचेरी शामिल होंगे। राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की एकल संक्रमणीय मत पद्धति के द्वारा किया जाता है। उसे राष्ट्रपति पद पर दोबारा निर्वाचित किया जा सकता है। राष्ट्रपति पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा, और उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।

अर्हता
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 58 में कहा गया है कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के पास निम्नलिखित अर्हताएं होनी आवश्यक हैं:

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
  • उसमें लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता हो।
  • वह संघ या किसी भी राज्य सरकार या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के तहत किसी लाभ के पद पर कार्यरत न हो

कार्यकाल
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 56 में कहा गया है कि पदभार ग्रहण करने के बाद से राष्ट्रपति पांच साल की अवधि के लिए पद धारण करेगा। वह भारत के उपराष्ट्रपति को लिखित रूप से इस्तीफा देकर पदच्युत हो सकता है। लेकिन जब तक कि उसका उत्तराधिकारी उसका पद नहीं संभाल लेता तब तक वह इस्तीफा देने के बावजूद भी अपने पद पर नियत रहेगा। और इसका पद रिक्त होने से पहले इसके लिए एक चुनाव आयोजित किया जाना चाहिए।

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