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उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति की भूमिका

भारत के संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का कार्यालय स्वतंत्र भारत में दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के ‘कार्यकारी’ अध्यक्ष हैं। भारत में उपराष्ट्रपति का कार्यालय राष्ट्रपति के पूरक है, जिसमें वह उपराष्ट्रपति की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति की भूमिका निभाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, उपराष्ट्रपति की भूमिका भारत गणराज्य के नाम मात्र के राष्ट्रपति की सहायता करना है। हालांकि, किसी को याद रखना चाहिए कि भारत के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का कार्यालय को एक व्यक्ति में संयुक्त नहीं किया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य

राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति भारत के सर्वोच्च गणमान्य व्यक्ति हैं, और कुछ शक्तियां उपराष्ट्रपति के कार्यालय में निहित हैं। वे शक्तियां इस प्रकार हैः

  • राष्ट्रपति के बीमार होने या किसी अन्य कारणवश अनुपस्थित होने पर उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करेंगे जिनको करने में राष्ट्रपति असमर्थ हैं।
  • राष्ट्रपति के कार्यालय में किसी भी रिक्ति के मामले में जैसे उनकी मौत हो जाना, इस्तीफा, महाभियोग के माध्यम से हटाया जाना या और कोई कारण होने पर उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे।
  • उपराष्ट्रपति तब तक राष्ट्रपति के कर्तव्यों का पालन करेंगे जब तक कि एक नए राष्ट्रपति का चुनाव होकर वह कार्यालय में पदासीन न हो जाएं।
  • उपराष्ट्रपति राज्य परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
  • जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, या उनके कार्यों का निर्वहन करते हैं, तो वह उस दौरान राज्य परिषद के अध्यक्ष के रूप में किए जाने वाले सामान्य कार्यों को करना बंद कर देते हैं।

पात्रता मानदंड

  • भारत के उपराष्ट्रपति बनने के लिए आवश्यक योग्यता निम्नलिखित हैं:
  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • उसकी उम्र 35 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
  • उसे किसी लाभ पद पर या उसका कार्यालय नहीं होना चाहिए।
  • उसे राज्यसभा या राज्य परिषद के सदस्य के रूप में चुनाव के लिए योग्यता प्राप्त होनी चाहिए।
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